सच्चाई का आईना !!!!
By Ujjwal Patni ,Posted on 2015-03-31

एक शीर्ष आटोमोबाइल कंपनी के इंजीनियरों हेतु दिये गये मोटिवेशनल उद्बोधन के अंश प्रस्तुत है। यह स्पीच आपको उद्वेलित करेगा, सोचने पर प्रेरित करेगा और आप जीवन के बड़े निर्णय लेने की स्थिति में पहुंचेंगे।

इस संसार में कोई भी व्यक्ति अनुपयोगी या नाकाबिल नहीं है क्योंकि भगवान के पास इतना वक्त नहीं है कि वो निम्नस्तरीय वस्तुऐं बनाऐ। हर व्यक्ति में कुछ खास बात होती है। यह अलग बात है कि कुछ लोगों की पूरी उम्र निकल जाती है और वे अपनी खासियत पर फोकस करके, उसे पहचान नहीं पाते।

हम सभी को चुनाव की शक्ति, निर्णय लेने की शक्ति और लिए गए निर्णय पर कार्य करने की शक्ति की जन्मजात भेंट मिली है। दुर्भाग्यवश इन तीन महत्वपूर्ण शक्तियों को हमने श्राप में परिवर्तित कर दिया है। चुनाव करने की शक्ति से हम एक्शन की जगह बहाने (excuse), पसीने की जगह आराम, खुशी की बजाय तनाव, और खुद को चैलेन्ज करने की जगह पलायन का चुनाव करने लगे हैं। इन गलत चुनावों की वजह से एक कमतर जिंदगी मिलती है और हम अपनी क्षमताओं का उपयोग नहीं कर पाते। कुछ साहसी लोग जो सही चुनाव कर पाते हैं, लोग उनकी सफलता की चर्चा करते हैं।

निर्णय लेने की शक्ति से सही निर्णय लेने की जगह हम स्वयं तथा दूसरों के बारे में गलत निर्णय करते हैं। हम खुद को कम आँकर स्वयं से अपेक्षाओं को छोटा कर लेते हैं। हम खास बनने की जगह जाने-अनजाने ‘‘आम‘‘ बनने का निर्णय लेते हैं। सच तो यह है कि ‘‘अनिर्णय‘‘ आज सबसे आम निर्णय हो गया है।

एक्शन लेने की शक्ति होने के वावजूद हम एक्शन ना लेने का निर्णय करते हैं। टालमटोल, गाॅसिप और चिन्ता सारे विश्व की एक्शन भाषा हो गई है। दुखदायी यह है कि हर आदमी एक शानदार बंगला, गाड़ी बैंक बैलेंस, विदेश यात्रा जैसी सुविद्याओं का सपना देखता है परंतु उसके लिए एक्शन का पसीना बहाने की कीमत नहीं चुकाना चाहता।

प्रिय साथियो, ईश्वर हमें बनाकर खुद शर्मिंदा है। वो सोच में है कि ये असाधारण शक्तिमान लोग अपनी शक्ति का दोहन क्यों नहीं करते। जो शक्ति इनके भीतर कूट-कूट कर भरी है, उस का उपयोग क्यों नहीं करते।

सच तो यह है कि भीतर से हम सब एक हैं, चाहे सफल हो या असफल। फर्क सिर्फ इतना है कि सफल लोग खुद को गंभीरता से लेते हैं, सीखकर विकसित होते हैं, खुद को चुनौती देते हैं, खुद से प्रतिस्पर्धा करते हैं और आगे बढ़ते जाते हैं। वो सामान्य से कार्य में थोड़ा एक्सट्रा डालकर उसे स्पेशल बना देते हैं।

आखिर कौन रोक रहा है हमको? हमें इस धरती पर बिना एमआरपी या प्राइस टैग के इसीलिए भेजा गया ताकि हम अपना मूल्य स्वयं तय कर सकें। हमने अपनी तरक्की की बाधाऐं स्वयं चुनी हैं।

सोचिए, आप या आपके बच्चे Dhiru Bhai Ambani, Narayana Murthy, Steve JOBS, Bill Gates या Sachin Tendulkar क्यों नहीं बन सकते। उनके माता-पिता ने भी उनके बचपन में नहीं सोचा होगा कि एक दिन उनके बच्चे इस ऊंचाई पर पहुंचेंगे। मैं इतना साधारण छात्र था कि मेरे माता-पिता ने कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन मैं मोटिवेशनल स्पीकर बनूंगा, मेरी पुस्तकें बारह भाषाओं में आएंगी या लोग आटोग्राफ लेने के लिए भीड़ लगाऐंगे। कौन आपके बारे में आज क्या सोचता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। दुनिया अंततः परिणाम को सलाम करती है।

आज नही ंतो कल, भाग्य उनकी जरूर मदद करता है जो बुद्धि के साथ पसीना लगाने को तैयार है। लोग मेरी सफलता का रहस्य पूछते हैं। मेरे पास सिर्फ चार शब्दों का उत्तर है- बड़ा सोचो, काम करो। बड़ा सोचने और बडे कार्य करने की शक्ति हमारे भीतर है। दूसरे आप पर ज्यादा भरोसा नहीं करते तो चिंतित ना हो, ये आपकी नहीं उनकी समस्या है। शिखर के बारे में सोचने की आदत बनाइए। अपनी संतानों और अपनी टीम को उत्कृष्टता हेतु प्रेरित कीजिए। आप नहीं जानते कि भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है परंतु आप अपने वर्तमान पर कार्य कर सकते हैं। यही ढेर सारे वर्तमान मिलकर भविष्य का निर्णय करेंगे।

श्रेष्ठता, सही संगत, खुद से प्रतिस्पर्धा और सतत सीखने को अपनी आदत बना लीजिए फिर जीवन स्वमेव बेहतर होता जाएगा। ये तीनों शक्तियों आपके भीतर छुपी है जो आपके जीवन की ऊंचाई तय कर रही है। चुनने की शक्ति, निर्णय लेने की शक्ति और एक्शन करन की शक्ति का सजगता से उपयोग कीजिए। यह निर्णय आपको आज और अभी लेना होगा।

यह स्पीच मैंने एक शीर्ष आटोमोबाइल कंपनी के कर्मचारियों को दिया था जिसकी सैकड़ों प्रतियां बनाकर कर्मचारियों के बीच वितरित किया गया। यह व्हाटस एप और फेसबुक के माध्यम से लाखों लोगों तक पहुंचा। मैं स्वयं भी अपने इस स्पीच को पढ़ता हूं तो मेरा मन नयी प्रेरणा से भर उठता है।

अंतर्राष्ट्रीय ट्रेनर एवं मोटिवेशनल लेखक

डॉ. उज्जवल पाटनी